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पटना एम्स की बड़ी उपलब्धि:एम्स पटना ने किया बिहार का पहला सफल जटिल लीवर प्रत्यारोपण

ByAryabhatta news

Oct 14, 2025
  • एक लीवर डोनर से 8 लोगों की जान बचाई जा सकती है डोनर के बीच जागरूकता अभियान चलाने की अपील

पटना : एम्स पटना ने बिहार का पहला सफल लीवर प्रत्यारोपण कर ऐतिहासिक उपलब्धि दर्ज किया है। इसका नेतृत्व एम्स पटना के वर्तमान कार्यकारी निर्देशक डॉ .ब्रिगेडियर राजू अग्रवाल ने किया। उनकी दूरदर्शी नेतृत्व क्षमता ने संस्थान में अत्याधुनिक प्रत्यारोपण सेवाओं की शुरुआत ,करीब दो दर्जन बहु-विषयक टीम को इस ऐतिहासिक परिणाम तक पहुँचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। कार्यकारी निर्देशक डॉ ब्रिगेडियर राजू अग्रवाल ने प्रेस कॉन्फरेंस में सब से पहले समस्तीपुर की ब्रेन डेड डोनर समस्तीपुर की त्रेता देवी, जिन्होंने साहसपूर्वक अपना लीवर, कॉर्निया और किडनियां दान कर जीवन का उपहार देकर,बिहार के लोगों को अंगदान के महत्व के प्रति प्रेरित किया,उसके प्रति आभार व्यक्त करने के साथ साथ श्रद्धांजलि अर्पित करता हूं। साथ इसकी सफलता के लिए एम्स की पूरी मेडिकल को बधाई और शुभकामनाएं देता हूं। उहोंने आम जनता से अपील किया है कि,इस कार्य के लिए खास कर डोनर को जागरूक किया जाना चाहिए ताकि,जरूरतमंद लोगों की जान बचाई जा सके। उहोंने कहा कि , एक लीवर डोनर के सभी ऑर्गेंस से 8 लोगों की जान बचाई जा सकती है।
लीवर प्रत्यारोपण कार्यक्रम की रूपरेखा और लॉजिस्टिक व्यवस्था पूर्व कार्यकारी निदेशक डॉ. जी. के. पाल और डॉ. सौरभ वस्नैय के उल्लेखनीय योगदान से संभव हुई। उनके समर्पण और रणनीतिक योजना ने इस परिवर्तनकारी प्रक्रिया को संभव बनाया। यह जटिल प्रत्यारोपण सर्जरी एम्स पटना के सर्जिकल गैस्ट्रोएंटेरोलॉजी विभाग ‌द्वारा सावधानी पूर्वक की गई, जिसमें चार जीआई और एचपीबी सर्जन डॉ. उत्पल आनंद (विभागाध्यक्ष), डॉ. कुनाल परसर, डॉ. बसंत नारायण सिंह और डॉ. किसलय कांत ने नई दिल्ली के साकेत स्थित सीएलबीएस मैक्स अस्पताल के प्रसिद्ध प्रत्यारोपण दल के साथ मिलकर कार्य किया, जिसका नेतृत्व डॉ. सुभाष गुप्ता ने किया। यह सफलता असाधारण टीम वर्क और अंतरविभागीय सामंजस्य का उत्कृष्ट उदाहरण है। एनेस्थीसियोलॉजी विभाग, जिसका नेतृत्व डॉ. उमेश भदानी, डॉ. रजनीश कुमार, डॉ. कुनाल सिंह, डॉ. अभुदय कुमार और डॉ. नीरज कुमार ने किया, ने ऑपरेशन और ऑपरेशन के बाद की सुरक्षा सुनिश्चित की। मेडिकल गैस्ट्रोएंटेरोलॉजी की टीम – डॉ. रमेश कुमार और डॉ. सुधीर कुमार ने विशेषज्ञ पूर्व और पश्च-ऑपरेटिव चिकित्सा देखभाल प्रदान की। रेडियोलॉजी विभाग से डॉ. राजीव प्रियदर्शी ने व्यापक इमेजिंग सहायता दी, जबकि ट्रॉमा सर्जरी से डॉ. अनिल कुमार ने मृत अंगदान की लॉजिस्टिक व्यवस्था का समन्वय किया। रोग-निर्णय में पैथोलॉजी विशेषज्ञ डॉ. पुणम भदानी, डॉ. तरुण कुमार और डॉ. सुरभि का योगदान अमूल्य रहा। ट्रांसफ्यूजन मेडिसिन टीम के प्रमुख डॉ. बंकिम ने ऑपरेशन के लिए महत्वपूर्ण रक्त उत्पाद उपलब्ध कराए। डॉ. उत्पल आनंद ने इस असाधारण टीम वर्क के लिए हार्दिक आभार व्यक्त करते हुए कहा कि बिहार का पहला लीवर प्रत्यारोपण एम्स पटना की उन्नत लीवर देखभाल विस्तार करने की प्रतिबद्धता को मजबूत करता है। इस उपलब्धि को निवासी डॉक्टरों, प्रत्यारोपण संयोजक जिनिल राज, प्रशिक्षित नर्सिंग स्टाफ, ऑपरेशन थिएटर टीम और एम्स पटना के क्रिटिकल केयर विशेषज्ञों के अथक समर्पण ने और मज़बूत किया। उनकी विशेषज्ञता और समर्पण इस सफलता में बुनियादी रहे। इस उपलब्धि के साथ ही एम्स पटना, बिहार में लीवर प्रत्यारोपण के अग्रदूत बन गया है। इस कार्यक्रम की शुरुआत बिहार और आसपास के राज्यों के मरीजों के लिए बड़ी राहत है, जिन्हें अब इस तरह की जटिल सर्जरी के लिए देश के अन्य हिस्सों में यात्रा करने की आवश्यकता नहीं होगी। उन्होंने बताया कि लीवर प्रत्यारोपण में जहां बाहर करीब 30-40 लाख खर्च होता है,यहां करीब 14 लाख खर्च होता है। वहीं बीपीएल परिवार को 90 प्रतिशत छूट भी दी जाती है। इस केअलावा केंद्र और राज्य सरकारों आदि से कई तरह का अनुदान दिया जाता है। वहीं डोनर को सभी तरह की मेडिकल सुविधा आदि दिया जाता है।

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